अच्छे कर्मचारी बनने के लिए इन्हें अपनायें
व्यवहार
व्यक्ति सबसे पहले अपने व्यवहार से जाना जाता है। अगर उसके पास काम करने का हुनर है, लेकिन वह व्यवहार कुशल नहीं है तो लोग उससे ठीक ढंग से घुलमिल नहीं पायेंगे। इसलिए जरूरी है खुद में कुछ खास तरह की खूबी पैदा करने की। जो कार्यस्थल पर न सिर्फ आपको सबसे आगे रखने में मददगार हो बल्कि उससे आपका व्यक्तित्व भी निखर उठे।
कार्य के प्रति लगन
प्रसिद्ध दार्शनिक सुकरात ने कहा है कि पानी में डूबते हुए किसी इंसान को हवा की जितनी इच्छा होती है उतनी ही इच्छा इंसान को अपने काम में दिखानी चाहिए। तात्पर्य यह है कि व्यक्ति को अपने काम में रम जाना चाहिए। अगर आप में भी काम को लेकर इतनी ललक और लगन पैदा हो जाए तो आपकी तरक्की होने से कोई नहीं रोक सकता।
जिम्मेदारी
अगर आपमें जिम्मेदारी लेने का हुनर है और आप चुनौती लेने का माददा रखते हैं तो आप कोई भी काम बडी् आसानी से कर सकते हैं। जिम्मेदारी लेने से कार्यस्थल पर आपकी अलग छवि बनती है। यहां आप यह ध्यान रखें किि जिम्मेदारी सिर्फ लेना ही बडी् बात नहीं होती है बल्कि उसे निभाना महत्वपूर्ण होता है। इसलिए जब कभी जिम्मेदारी लेने का मौका मिले उसे बिना गवांए स्वीकार करें और जुट जाएं उसे पूरा करने में।
कडी् मेहनत
काम कोई भी हो उसे हल्के में न लें। याद रखे कभी कभी बहुत आसान लगने वाला काम भी आपको मुश्किल में डाल सकता है। इसलिए जब आपको किसी काम की जिम्मेदारी दी जाए उस पर वर्क आउट करें। कभी भी आत्मविश्वासी न बनें। कडी् मेहनत करने वालों की हर जगह मांग होती है। इसलिए आलस और टालू रवैया न अपनाएं। ध्यान रहे कि आपकी मेहनत सही काम के लिए और सही समय पर की गई हो अन्यथा उसका कोई महत्व नहीं।
वचनबद्धता
अपने काम में कमिटमेंट को वरीयता दें। आप किसी से भी कुछ प्रॉमिश करें उसे हर हाल में निभाएं। अपनी बातो में निष्ठा लाएं। यहॉ निष्ठा से यह तात्पर्य है कि भले ही उस कमिटमेंट को निभाने में आपका नुकसान ही हो लेकिन यह आपका फर्ज है कि उस कमिटमेंट को पूरा करें। वचनबद्धता में ही एक और चीज आती है वह है बुद्धिमत्ता। बुद्धिमत्ता यानी आप उसी काम के लिए कमिट करें जिसे आप निभा पाऍं। इस तरह निष्ठा और बुद्धिमत्ता कमिटमेंट के दो आधार हैं और यह आधार और मजबूत तभी होगी जब आप इसे पूरी शिददत के साथ निभाऍंगे।
चरित्र
चरित्र व्यक्ति के लिए बहुत ही अनमोल होता है। अगर चरित्र एक बार चला गया तो लाख कोशिश की जाए वह फिर से वापस नहीं मिलता। इसलिए कोई भी वह कार्य जिससे आपके चरित्र पर उंगली उठे, उससे दूर रहें। जार्ज वाशिंगठन ने कहा है कि मै चाहता हूँ लोग मुझे एक ईमानदार आदमी के रूप में जानें जो मेरे लिए किसी भी ओहदे से कहीं ज्यादा महत्वपूर्ण है। इसलिए चरित्र को लेकर हमेशा सतर्क रहें। लोगों में आपकी विश्वसनीयता बनी रहें इसके लिए जरूरी है कि आप अपनी छवि को स्पष्ट रखें। कभी भी झूठ का सहारा न लें। याद रखें एक चरित्रवान व्यक्ति हर कहीं इज्जत पाता है।
विनम्र बनिए
अगर आपको लग रहा है कि आपके साथ पक्षपात हो रहा है या किसी प्रकार का अन्याय हो रहा है तो अपना पक्ष विनम्रता से रखिए। क्रोधित न हों और न ही बेवजह किसी पर चीखें-चिल्लाएं। अपना पक्ष शान्ति से रखें। थोडा् धैर्य रखिए और जब गुस्सा शांत हो तो बात कीजिए। कुछ समय बाद भी अगर आपको यही महसूस होता है, स्थितियों में बदलाव नहीं होता है तो मूल्यांकन कीजिए सहकर्मियों से चर्चा करें। देखें आपकी बात का समर्थन कितने लोग करते हैं। इसके बाद जो उचित लगे वह करें।
एक बेहतर कर्मचारी बनने के लिए इन बातों का अनुसरण करना होगा। ये बातें हैं तो बहुत ही मामूली, लेकिन जो इन्हें अपने रोजमर्रा की जिन्दगी में उतार लेगा, उसका कैरियर तो आगे बढे्गा ही, लोग उसकी तारीफ भी करेंगे।
कार्य के प्रति लगन
प्रसिद्ध दार्शनिक सुकरात ने कहा है कि पानी में डूबते हुए किसी इंसान को हवा की जितनी इच्छा होती है उतनी ही इच्छा इंसान को अपने काम में दिखानी चाहिए। तात्पर्य यह है कि व्यक्ति को अपने काम में रम जाना चाहिए। अगर आप में भी काम को लेकर इतनी ललक और लगन पैदा हो जाए तो आपकी तरक्की होने से कोई नहीं रोक सकता।
जिम्मेदारी
अगर आपमें जिम्मेदारी लेने का हुनर है और आप चुनौती लेने का माददा रखते हैं तो आप कोई भी काम बडी् आसानी से कर सकते हैं। जिम्मेदारी लेने से कार्यस्थल पर आपकी अलग छवि बनती है। यहां आप यह ध्यान रखें किि जिम्मेदारी सिर्फ लेना ही बडी् बात नहीं होती है बल्कि उसे निभाना महत्वपूर्ण होता है। इसलिए जब कभी जिम्मेदारी लेने का मौका मिले उसे बिना गवांए स्वीकार करें और जुट जाएं उसे पूरा करने में।
कडी् मेहनत
काम कोई भी हो उसे हल्के में न लें। याद रखे कभी कभी बहुत आसान लगने वाला काम भी आपको मुश्किल में डाल सकता है। इसलिए जब आपको किसी काम की जिम्मेदारी दी जाए उस पर वर्क आउट करें। कभी भी आत्मविश्वासी न बनें। कडी् मेहनत करने वालों की हर जगह मांग होती है। इसलिए आलस और टालू रवैया न अपनाएं। ध्यान रहे कि आपकी मेहनत सही काम के लिए और सही समय पर की गई हो अन्यथा उसका कोई महत्व नहीं।
वचनबद्धता
अपने काम में कमिटमेंट को वरीयता दें। आप किसी से भी कुछ प्रॉमिश करें उसे हर हाल में निभाएं। अपनी बातो में निष्ठा लाएं। यहॉ निष्ठा से यह तात्पर्य है कि भले ही उस कमिटमेंट को निभाने में आपका नुकसान ही हो लेकिन यह आपका फर्ज है कि उस कमिटमेंट को पूरा करें। वचनबद्धता में ही एक और चीज आती है वह है बुद्धिमत्ता। बुद्धिमत्ता यानी आप उसी काम के लिए कमिट करें जिसे आप निभा पाऍं। इस तरह निष्ठा और बुद्धिमत्ता कमिटमेंट के दो आधार हैं और यह आधार और मजबूत तभी होगी जब आप इसे पूरी शिददत के साथ निभाऍंगे।
चरित्र
चरित्र व्यक्ति के लिए बहुत ही अनमोल होता है। अगर चरित्र एक बार चला गया तो लाख कोशिश की जाए वह फिर से वापस नहीं मिलता। इसलिए कोई भी वह कार्य जिससे आपके चरित्र पर उंगली उठे, उससे दूर रहें। जार्ज वाशिंगठन ने कहा है कि मै चाहता हूँ लोग मुझे एक ईमानदार आदमी के रूप में जानें जो मेरे लिए किसी भी ओहदे से कहीं ज्यादा महत्वपूर्ण है। इसलिए चरित्र को लेकर हमेशा सतर्क रहें। लोगों में आपकी विश्वसनीयता बनी रहें इसके लिए जरूरी है कि आप अपनी छवि को स्पष्ट रखें। कभी भी झूठ का सहारा न लें। याद रखें एक चरित्रवान व्यक्ति हर कहीं इज्जत पाता है।
विनम्र बनिए
अगर आपको लग रहा है कि आपके साथ पक्षपात हो रहा है या किसी प्रकार का अन्याय हो रहा है तो अपना पक्ष विनम्रता से रखिए। क्रोधित न हों और न ही बेवजह किसी पर चीखें-चिल्लाएं। अपना पक्ष शान्ति से रखें। थोडा् धैर्य रखिए और जब गुस्सा शांत हो तो बात कीजिए। कुछ समय बाद भी अगर आपको यही महसूस होता है, स्थितियों में बदलाव नहीं होता है तो मूल्यांकन कीजिए सहकर्मियों से चर्चा करें। देखें आपकी बात का समर्थन कितने लोग करते हैं। इसके बाद जो उचित लगे वह करें।
एक बेहतर कर्मचारी बनने के लिए इन बातों का अनुसरण करना होगा। ये बातें हैं तो बहुत ही मामूली, लेकिन जो इन्हें अपने रोजमर्रा की जिन्दगी में उतार लेगा, उसका कैरियर तो आगे बढे्गा ही, लोग उसकी तारीफ भी करेंगे।
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